
इंदौर। SOM SAGAR NEWS.
होलिका दहन को लेकर अनेक क्षेत्रों में 2 और 3 मार्च को लेकर मतभेद की स्थिति बनी हुई है। लेकिन शास्त्रों के अनुसार होलिका दहन 2 मार्च पूर्णिमा को अर्धरात्रि में 1 से 2 बजे के बीच भद्रा पुच्छकाल में किया जाना शास्त्र सम्मत है। होलिका दहन के दूसरे दिन यानी 3 मार्च को अधिकांश स्थानों में परंपरा के अनुसार होली खेली जाएगी, लेकिन 3 तारीख को चंद्र ग्रहण के कारण बहुत से स्थानों पर 4 मार्च को होली खेली जाएगी।
यह जानकारी शंकराचार्य मठ इंदौर के अधिष्ठाता डॉ. गिरीशानंदजी महाराज ने दी। महाराजश्री ने बताया कि 3 मार्च पूर्णिमा के दिन खग्रास चंद्रग्रहण भारत में ग्रस्तोदित खंड चंद्रग्रहण के रूप में दिखेगा। भारत के साथ यह ग्रहण पूर्वी एशिया, आॅस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर और अमेरिका आदि में दिखाई देगा। ग्रहण का शुभारंभ 3.20 बजे दिन में ग्रहण का मध्य 5.4 बजे शाम को और मोक्ष शाम 6.45 मिनट पर होगा। इस ग्रहण का मोक्ष ही खंड चंद्रग्रहण के रूप में देखने को मिलेगा।
डॉ. गिरीशानंदजी महाराज ने बताया कि पूर्वी भागों में जहां चंद्रोदय शाम को 5.10 मिनट के आसपास होगा, वहां मोक्ष खग्रास चंद्रग्रहण के रूप में दिखेगा। ध्यान रहे ग्रहण का सूतक चंद्रोदय के 9 घंटे पहले से लगता है, पर आपातकाले मर्यादा नास्ति… धार्मिक मान्यता है कि बालक, वृद्ध और रोगी को छोड़कर अन्य लोगों के लिए सूतककाल से भोजन निषिद्ध है। ग्रहण समाप्त होने पर ही स्नान आदि करके यथाशक्ति दान देना चाहिए।
