
इंदौर। क्या इंदौर की गलियों से लेकर देश के बाजारों तक ज़हर परोसा जा रहा है? क्या मुनाफे की भूख में इंसानी ज़िंदगियों से खुला खेल खेला जा रहा है? ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि कैलाश चंदवानी और राजा चंदवानी पर काली मिर्च सहित मसालों में जहरीले केमिकल से मिलावट करने के गंभीर आरोप सामने आए हैं।
सूत्रों के अनुसार, पालदा से सियागंज तक फैले मसाला व्यापार में कथित रूप से ऐसा नेटवर्क खड़ा किया गया है, जो केवल इंदौर ही नहीं बल्कि देश के कई हिस्सों में सप्लाई करता है। आरोप है कि मुनाफा बढ़ाने के लिए खाद्य पदार्थों में हानिकारक रसायनों का उपयोग किया गया, जो आम लोगों की सेहत के लिए सीधा खतरा है।
खाद्य विभाग पर भी सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब खाद्य सुरक्षा अधिकारी कार्रवाई के लिए आगे बढ़ते हैं, तो राजनीतिक संरक्षण की दीवार क्यों खड़ी हो जाती है? क्या मिलावट के इस कथित खेल में प्रभावशाली चेहरों का हाथ है? और क्या इसी वजह से अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई?
सेहत से खिलवाड़, मौत का खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि काली मिर्च में उपयोग किए जाने वाले कुछ औद्योगिक केमिकल लीवर, किडनी और आंतों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यह सिर्फ मिलावट है या फिर जनस्वास्थ्य से खुला खिलवाड़?
जनता में आक्रोश, जांच की मांग
शहर के सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों ने मांग की है कि पूरे नेटवर्क की उच्चस्तरीय जांच हो, संबंधित गोदामों और मशीनों को सील किया जाए, राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए
सवाल जो जवाब मांगते हैं
- क्या मिलावट का यह कथित जाल अब भी सक्रिय है?
- क्या जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे रहेंगे?
- और सबसे बड़ा सवाल—अगर आज नहीं रोका गया, तो अगली मौत किसकी होगी?
अब निगाहें प्रशासन पर हैं।
क्या यह मामला भी फाइलों में दब जाएगा, या फिर सच में मिलावट के इस कथित साम्राज्य पर हथौड़ा चलेगा?